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Sunday, 16 March 2014

होली


होली
नज़ीर अकबराबादी
आ धमके ऐश वतरब क्या किया जब हुस्न दिखाया होली ने
हर आन ख़ुशी की धूम हुई यूं लुतफ़ जताया होली ने
हर ख़ातिर को ख़ूरसंद क्या हर दिल को लुभाया होली ने
दफ़ रंगीं नक़्श सुनहरी का जिस वक़्त बजाया होली ने
बाज़ार गली और कूचों में गुल शोर मचाया होली ने
या स्वांग कहूं या रंग कहूं या हुस्न बताऊं होली का
सब अबरन तले पर झमक रहा और केसर का माथे टीका
हंस देना हरदम नाज़ भरा दिखलाना सज धज शोख़ी का
हर गाली, मिस्री, क़नदभरी, हर एक क़दम अटखीली का
दिल शाद किया और मोह लिया ये, जोबिन पाया होली ने
कुछ तबले खटके ताल बजे कुछ ढोलक और मृदंग बजी
कुछ झड़पें बैन रबाबों की कुछ सारंगी और चंग बजी
कुछ तार तनबोरों के झनके, कुछ ढमढी और मुँह चंग बजी
कुछ घुंघरु खटके झुम झुम झुम कुछ गति गति पर आहंग बजी
है हर दम नाचने गाने का ये तार बंधाया होली ने
हर जगह  थाल गुलालों से, ख़ुश रंगत की गुलकारी है
और ढेर अबीरों के लागे, सौ इशरत की तैय्यारी है
हैं राग बहारें दिखलाते और रंग भरी पिचकारी है
मुँह सुर्ख़ी से गुलनार हुए तन केसर की सी क्यारी है
ये रूप झमकता दिखलाया ये रंग दिखाया होली ने
हर आन ख़ुशी से आपस में सब हंस हंस रंग छिड़कते हैं
रुख़सार गुलालों से गुल गों, कपड़ों से रंग टपकते हैं
कुछ राग और रंग झमकते हैं कुछ मै के जाम छलकते हैं
कुछ कूदे हैं, कुछ उछले हैं, कुछ हंसते हैं, कुछ बिकते हैं
ये तौर ये नक्शा इशरत का हर आन बनाया होली ने

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