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Saturday, 6 August 2016

अक़लमंद लड़का

अक़लमंद लड़का 
असलम जमशेदपुरी 

एक बादशाह का दरबारी था।वो बादशाह का सौदा सलफ़ लाने का काम किया करता था। बादशाह उसे बहुत मानता था। इस बात से दूसरे दरबारी क्रीम से हसद किया करते थे।
एक दिन सभी दरबारीयों ने मिलकर करीम के ख़िलाफ़ बादशाह को भड़काया।
हुज़ूर वो सौदा सलफ़ की क़ीमत ज़्यादा बताकर पैसे बचा लेता है।
हाँ हुज़ूर ।।।वो हमेशा आपको धोका देता है। बादशाह सबकी बातें ग़ौर से सुनने के बाद उनसे मुख़ातब हुआ।
अगर ऐसी बात है तो ठीक है हम इस पर कड़ी निगाह रखेंगे। बात आई गई हो गई।
एक दिन बादशाह को मालूम हुआ कि शहर में एक अँगूठीयों पर नाम लिखने वाला आया हुआ है। उसने एक दरबारी को भेज कर नाम लिखने की शरह दरयाफ़त की।दरबारी ने आकर बताया।
50पैसे फ़ी हर्फ़ हुज़ूर!
बादशाह ने कहा अच्छा जाओ क्रीम को भेज दो ।
थोड़ी देर बाद क्रीम बादशाह के हुज़ूर में हाज़िर हुआ।
आपने याद फ़रमाया बादशाह सलामत।।
हाँ क्रीम! हम अँगूठी पर हुस्न लिखवाना चाहते हैं । ये अँगूठी ले जाओ और इस पर लिखवा लाओ।
बादशाह ने क्रीम को अँगूठी और फ़ी हर्फ़ के हिसाब से तीन हर्फ़ के डेढ़ रुपय दिए।करीम बाज़ार चला गया।
कुछ देर बाद क्रीम अँगूठी पर हुस्न लिखवा कर ले आया।
लीजीए बादशाह सलामत।।।
बादशाह ने अँगूठी को ग़ौर से देखा। इस पर हुस्न लिखा हुआ था।वो क्रीम से मुख़ातब हुआ।
क्रीम।।।कुछ लोगोंने तुम्हारी शिकायत की थी कि तुम सौदा सलफ़ लाने में कुछ पैसे बचा लेते हो।।।।हमने आज तुम्हारा इमतिहान लेने की ख़ातिर।।लिखने की शरह का पता लगवाकर तुम्हें तीन हर्फ़ के डेढ़ रुपय दिए थे। अब तुम सच्च सच्च बताओ क्या तुमने आज भी पैसे बचाए हैं।।।?
हुज़ूर जब आप पूछ रहे हैं तो मैं बताए देता हूँ। मैंने आज 50पैसे बचाए हैं। मैं जब नाम लिखने वाले पास पहुंचा तो मैंने उसे अँगूठी दी और इस से इस पर ख़स लिखने को कहा। जब वो हिस बना चुका और ह् पर नुक़्ता रखने ही जा रहा था तो मैंने कहा,भाई साहिब! आप इस नुक़्ते को स के पेट में रख दीजीए।उसने ऐसा ही किया।मैंने उसे एक रुपया दिया,और आगया।।।
बादशाह ने जो बड़े ग़ौर से क्रीम की अक्लमंदी की कहानी सन रहा था, उठकर क्रीम को गले से लगा लिया और इस दिन से इस के ओहदे में तरक़्क़ी कर दी।

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